मई के महीने में होने वाला है कुछ ऐसा कि एक गलती से टूट सकता है सपा और बसपा का गठबंधन !

उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव का हाल ऐसा रहा कि सपा ने अपने उम्मीदवार को राज्यसभा पहुंचा तो दिया लेकिन गठबंधन के आधार पर बसपा को राज्यसभा की चौखट तक नही पहुंचा पाई. इसके पहले जब ये गठबंधन बना था तब बसपा ने सपा को लोकसभा उपचुनाव में मदद की थी और नतीजा ये रहा था कि सपा के दो सांसद फूलपुर और गोरखपुर से जीते थे लेकिन यह गठबंधन राज्यसभा चुनाव में कुछ खास करामात नहीं दिखा पाया. अब एक बार फिर से अखिलेश यादव को मायावती के विधायकों की जरूरत पड़ेगी. बता दें कि मई में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 12 सीटें खाली हो रही है ऐसे में अब देखना ये है कि क्या अब फिर से सपा का साथ बसपा देगी ?

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NBT की खबर के मुताबिक मई के महीने में विधान परिषद की 12 सीटें खाली हो रही हैं, ऐसे में एक बार फिर से सपा और बसपा के गठबंधन की कड़ी परीक्षा होगी. परीक्षा इसलिए भी क्योंकि राज्यसभा में मनमुताबिक नतीजे ना आने की वजह से मायावती को निराशा हाथ लगी है, ऐसे में फिर से बसपा सपा को सपोर्ट करेगी या नहीं इस संशय बना हुआ है. बता दें कि मई में जो सीटें खाली हो रही हैं उनमें योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री मोहसिन रजा और महेंद्र सिंह के साथ यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव की भी सीट हैं.

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हालाँकि जब गठबंधन हुआ था तब बसपा सुप्रीमों मायावती ने पहले ही साफ कर दिया था कि वो सपा को मदद करेंगी लेकिन राज्यसभा चुनाव में बसपा को फायदा ना मिलने से अब उम्मीदें लगाई जा रही हैं कि क्या मायावती अपने इस फैसले पर पुनः विचार करेंगी ? बसपा के सूत्रों का कहना है कि “विधान परिषद के चुनावों के लिए अभी कोई फैसला नहीं हुआ है. हम इसको लेकर बहन जी के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. उसके बाद ही ये साफ हो पायेगा कि वो सपा को एमएलसी मदद करेंगे या नहीं.”

अब ऐसे में अगर बसपा ने विधान परिषद् चुनाव में सपा को सपोर्ट नहीं किया तो मुमकिन है कि ये गठबंधन जो मोदी सरकार को हराने का दावा कर रही है, वो खुद टूट जाये. अब देखना ये है कि मई के महीने में होने वाले इस चुनाव को लेकर मायावती कैसा रुख अख्तियार करती हैं.