राज्यसभा चुनाव में सीएम योगी की ये चाल भांप नहीं पाई विपक्ष, जिसकी वजह से खानी पड़ी मुंह की

यूपी लोकसभा चुनाव में बीजेपी को गठबंधन वाली पार्टियों से ज़रा कम वोट क्या मिले लोगों ने ये बोलना शुरू कर दिया था कि भाई ये तो एक अंत का आगाज़ है. अब बीजेपी ख़त्म होने वाली है, वगैरह-वगैरह. यूपी लोकसभा की इस हार के बाद विपक्ष ने मानो कसम खा ली देश को ये जताने और बताने की कि ये हार यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की वजह से है. ऐसे में इस हार-जीत को अभी महज़ 2 हफ्ते भी बीत नहीं पाए थे कि योगी आदित्यनाथ ने एक ऐसा दांव फेंका जिससे गठबंधन की सरकार को भी पस्त होने में मिनट नहीं लगा.

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कैसे? जानिए यहाँ 

ये बात तो अबतक सभी जान चुके हैं कि उत्तर-प्रदेश राज्यसभा चुनाव में दसवीं सीट के लिए मची उठा-पटक के बीच समाजवादी पार्टी-बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार को पटखनी देते हुए बीजेपी ने ये सीट अपने पाले में हासिल कर ली है. 

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दरअसल यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 23 मार्च शुक्रवार को मतदान हुआ. इस चुनाव की काउंटिंग किसी सस्पेंस मूवी से कम नहीं थी. जहाँ लोगों को गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में बीजेपी की हार याद आ रही थी वहीँ पूरा समीकरण उलट-पलट करते हुए जैसे ही ये जीत बीजेपी के खेमे में गयी विपक्ष को तो मानो 440 वॉट का ऐसा झटका लगा जिसका दर्द अभी लम्बे समय तक रहने वाला है.

जहाँ अबतक उपचुनाव की हार का जिम्मेदार सीएम योगी आदित्यनाथ को माना जा रहा था वहीँ राज्यसभा चुनाव में बीजेपी को जो जीत हासिल हुई है उसका काफ़ी ज्यादा श्रेय सीएम योगी को ही जाता है. बताया जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव के जो परिणाम अब सामने आये हैं इसमें सीएम योगी आदित्यनाथ की चाक चौबंद, समझदार रणनीति और कुशल प्रबंधन का बड़ा योगदान रहा है.

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माना जा रहा था कि गोरखपुर और फूलपुर में योगी आदित्यनाथ की हार का सीधा कारण उनका ओवर-कॉन्फिडेंस था. ऐसे में राज्यसभा चुनाव में अपनी इसी हार से सीख लेते हुए सीएम योगी ने इस चुनाव में अपनी पैनी नज़र हर कदम पर बनायीं हुई थी. बताया तो यहाँ तक जा रहा है कि अपनी पिछली गलती ना दोहराते हुए इस चुनाव के लिए दो बार विधायकों की ट्रेनिंग सीएम आवास पर करवायी गयी थी. सिर्फ इतना ही नहीं राज्यसभा चुनाव में जीत हर हाल में पुख्ता करने के लिए सीएम योगी ने दूसरे दलों के विधायक (जो वोट देने का वादा कर रहे थे) से खुद सीएम आवास पर मुलाकात और बातचीत की.

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इस जीत में सीएम योगी का है बहुत बड़ा योगदान

इस चुनाव में सबसे ख़ास बात ये भी रही कि इस चुनाव के दौरान ये साफ़ दिखा कि सीएम योगी का उनकी बिरादरी के नेताओं पर कितना असर है. कहना गलत नहीं होगा कि उनके इसी सकरात्मक प्रभाव के बदले इस चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार को इतनी शानदार जीत मिली है.

इस बारे में बात करते हुए योगी आदित्यनाथ के एक बेहद नज़दीकी सलाहकार ने बताया कि, “नौवें उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए हमारे पास पर्याप्त विधायक नहीं थे. ऐसे में हमारी योजना विपक्षी उम्मीदवार को 36 विधायकों के मत हासिल करने से रोकने की थी, क्योंकि इसके बाद दूसरी वरीयता से नतीजा होना था, जो हमारे पक्ष में होना ही था.”