पीएम मोदी ने ओमान जाकर वो किया जो किसी दूसरे प्रधानमंत्री ने नहीं किया था !

तीन देशों की चार दिवसीय दौरे के बाद सोमवार को पीएम मोदी दिल्ली वापस आ गये हैं लेकिन इस दौरे में उन्होंने कुछ ऐसा किया जो अभी तक किसी भी पूर्व प्रधानमंत्री ने नहीं किया था. बता दें कि पीएम मोदी अपने इस दौरे में फिलीस्तीन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ओमान गये थे. इस दौरे में ओमान जाना काफी अलग था. क्योंकि माना जा रहा था कि ओमान और भारत के कूटनीतिक रिश्तों में जो गर्मजोशी थी उसमें कमी आ गयी थी. यहां जानना जरुरी है कि ओमान और भारत के कूटनीतिक रिश्तों की शुरुआत 1970 में उस वक्त हुई थी, जब ओमान की सत्ता सुल्तान कबूस बिन सैद अल-सैद ने अपने हाथ में ली. उस वक्त ब्रिटेन और भारत ही ऐसे दो देश थे जिनके साथ ओमान के कूटनीतिक रिश्ते थे.

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ओमान के सुल्तान थे नाराज

बीबीसी के आर्टिकल के मुताबिक भारत और ओमान के बीच 1970 से ही लगातार कूटनीतिक, राजनीतिक, व्यापार और नौसैनिक सहयोग जारी रहा है लेकिन बीच में कुछ समय ऐसे रहे हैं कि ओमान और भारत के बीच रिश्तों में गर्माहट नही देखी गयी. दरअसल जब देश में कांग्रेस की सरकार थी और रक्षामंत्री प्रणव मुखर्जी थे तो उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान वादा किया था कि भारत, ओमान के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाएगा, लेकिन ये वादा सिर्फ वादा ही रह गया और इस दिशा में कोई ख़ास प्रगति नहीं हुई. ये तो एक शुरुआत थी, दोनों देशों के रिश्तों के ठंडे होने की, सुल्तान सैद अल-सैद वक्त उस और नाराज हो गये जब 2004 में ओमान के सुल्तान को जवाहर लाल नेहरू पुरस्‍कार दिया जाना था और उन्हें इसे लेने के लिए भारत भी आना था. सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन कुछ गलतफहमी ऐसी हुई कि सुल्तान को पर्सनल न्योता ही नहीं दिया गया और अवार्ड को राजदूत के ज़रिए उन्हें भेज दिया गया था, जिसके बाद सुल्तान काफी नाराज हो गये थे.

ओमान के सुल्तान कबूस बिन सैद अल-सैद

अब पीएम मोदी कर रहे हैं रिश्ते को ठीक करने की कोशिश 

कहा जाता है कि यही वजह थी कि वो भारत के गणतंत्र दिवस के मौके पर भी नहीं आये थे. अब जबकि पीएम मोदी की नीति ही यही है कि दूसरे देशों से व्यापार और सुरक्षा के मामलों में रिश्ते अच्छे किये जाएँ तो ऐसे में वो ओमान गये और दोनों देशों के बीच ठंडे पड़े रिश्ते में गर्मजोशी लाने का काम किया है जोकि इससे पहले के प्रधानमंत्रियों ने नहीं किया था.

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भारत की मदद करता आया है ओमान

अगर भारत और ओमान के बीच रिश्तों की बात करें तो समुद्र में सुरक्षा करने के मामले में ओमान अक्सर भारत की मदद करता आया है. अदन की खाड़ी और सोमालिया में समुद्री लुटेरों से भारतीय जहाजों को बचाने में ओमान हिन्दुस्तानी नौसेना को अपने बंदरगाहों में सुविधाएं देता है. यही नहीं ओमान वहां पर इफ़को द्वारा बनाए एक फ़र्टिलाइज़र प्लांट के लिए जरुरी गैस मुहैया कराने का काम करता है और काफ़ी मात्रा में सामान भी खरीदता है. अब ऐसे में पीएम मोदी ओमान का दौरा करके रिश्तों पर जमीं बर्फ को पिघलाने का काम कर रहे हैं जिससे भारत को भी फायदा हो.