देश के लिए शहीद हुए जवान के बेटे से सीएम ने पूछा एक सवाल जिसका जवाब सुनते ही सीएम शिवराज ने किया ऐसा ऐलान कि सभी रह गए हक्के बक्के !

पाकिस्तान द्वारा की गयी फायरिंग में चार जवान शहीद हो गए. हमारे देश को हमारे शहीदों पर नाज है और वहीँ पाकिस्तान के खिलाफ़ गुस्सा भरा पड़ा है. इसी मुठभेड़ में शहीद हुए जवान ग्वालियर के शहीद रामअवतार सिंह लोधी का पार्थिव शरीर उनके गाँव बरौआ पहुंचाया गया और भारत माता के जयकारों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया.  शहीद रामअवतार सिंह लोधी के मासूम बेटे दिव्यांश ने अपने शहीद पिता को मुखाग्नि दी और इस अवसर पर सेना के जवानों ने गार्ड आॅफ आॅनर देते हुए बंदूकों से सलामी दी.

आपको जानकर हैरानी होगी कि dainik jagran के अनुसार कश्मीर के राजाैरी सेक्टर में पोस्ट पर पाक रेंजर के मिसाइल हमले में शहीद बरौआ गांव के जवान राम अवतार सिंह ने दुश्मन से लड़ने के लिए दो माह पहले ही सेना की किचन से निकलकर राइफल थाम ली थी. ऐसा करने के लिए उन्होंने अफसरों से मंजूरी लेकर परीक्षा भी पास की थी. कहा जाता है कि शहीद राम अवतार को सेना की वर्दी पहनने का जज्बा बचपन से ही था, उन्होंने सेना की वर्दी पहनने के लिए अपनी बड़ी बहन के पास जमाहर गांव में रहकर स्कूली शिक्षा पूरी की थी.

शहीद हुए ग्वालियर के सपूत राइफलमैन वीर शहीद श्री रामावतार लोधी जी को श्रद्धांजलि देने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें पार्थिव देह पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.  शहीद रामावतार लोधी जी का तीन साल का बेटा भी है जिसका नाम है दिव्यांश. दिव्यांश को गोदी में बैठाकर सीएम शिवराज सिंह ने पूछा कि बेटा स्कूल जाते हो? उसने हाँ बोले हुए अपना सिर हिल दिया.

इसके बाद सीएम शिवराज सिंह ने फिर पूछा कि किस स्कूल में जाते हो,  तो लोगों ने बताया कि वह बानमोर में पढ़ने जाता है. सीएम ने लोगों से पूछा कि क्या इस गांव में स्कूल नहीं हैं ततो वहां मौजूद विधायक भारत सिंह ने बताया कि स्कूल है मगर वो 10वीं तक ही है. इसके बाद सीएम के बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि स्कूल का उन्नयन कर 12वीं तक कर दिया जाए और स्कूल की भव्य बिल्डिंग बनाकर उसे शहीद रामअवतार लोधी के नाम पर किया जाए.